तू लगती है – Hindi Poetry

ये रातकी चांदनी उजली धूप का गुमाँ लगती है,
सुबह की गिरती ओस, अब्र के सब्र का इम्तेहाँ लगती हैl

मासूम सा चेहरा तेरा, निगाहें तीर-ऑ-तरकश,
हसीं तेरी की इक ख़ंजर, तू मौत का सामां लगती हैl

रोम रोम अब जलता मेरा इश्क़में तेरे,
रूह तक मैं हूँ वाबस्ता मुश्क़ से तेरे,
सुबहकी सर्द शबनम भी तू ही, तू ही जलते चाँदका अरमान लगती हैl

जानता हूँ रुख़ हवाओं का नहीं बेहतर,
साथ मेरे तू भी हो ये थोड़ा मुश्किल है,
फ़िरभी तुझको जब मैं सोचूं, बात ये आसाँ लगती हैl

*गुमाँ= ભ્રમ, अब्र = આકાશ, सब्र = ધીરજ, तीर-ऑ-तरकश= તીર અને ભાથું, सामां = સામાન, वाबस्ता = સંબદ્ધ, मुश्क़ = (અહીં) સુગંધ,सर्द = ઠંડી, रुख़= દિશા, आसाँ = સરળ

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ये लगाए न लगनेवाली और बुझाए न बुझनेवाली चाहकी तपिश शायद ऐसी ही होती है.मजरुह सुल्तानपुरीने इसी पर कहा है की, “अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर, अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे|

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Swati Joshi is an Indian writer who loves to write in English and Indian Languages like Gujarati. Read her Gujarati Poetry and Motivational articles at Swati's Journal.
Swati Joshi

www.swatisjournal.com

2 Comments

  1. Avatar

    પૈમાના આશ્રર્ય માં ગરકાવ થયા મારી આંખો જોઈ,
    આટલો નશો આને કોના પ્રેમ નો ચડ્યો છે…
    #Vk

    Reply
  2. Swati Joshi

    વાહ!

    રચના માણવા તેમજ આટલા કાવ્યમય પ્રતિભાવ બદલ આભાર…

    સ્વાતિ

    Reply
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