जीवन के हर एक मोड़ पे इंसान खुद ही अपना सहारा बन सकता है. हर एक पड़ाव कुछ सिखाता ज़रूर है लेकिन जीवन की सबसे बड़ी सिख यही है की माहौल, मंज़र, किस्मत, चाहत कुछ भी एक सा रहे न रहे, ऐ इंसान तू ख़ुद को संभल लेना! बाहरी परिस्थितियाँ कितनी भी बदलें, हमारी असली ताकत हमारे भीतर ही होती है। खुद को संभालने और अपनी आंतरिक शक्ति पर भरोसा रखने की क्षमता ही हमें हर मुश्किल से निकलने में मदद करती है।
खुद को संभाल लेना…
बचपन से पकड़ी पापा की वो ऊंगली,
जब उड़ना पड़े बनकर तितली,
तो खुद को संभाल लेना।
जब बातों बातों में जागकर पूरी रात,
वह दोस्तों की महफ़िल भूलना पड़े,
तो खुद को थोड़ा संभाल लेना।
अजनबी कोई अपना यार बन जाए,
बिना उसके जीना मुश्किल हो जाए,
तो खुद को थोड़ा संभाल लेना।
जिससे हो बेशुमार प्यार,
और बदल जाए उनका व्यवहार,
बस खुद को तू संभाल लेना।
नाम करो बच्चों के अपनी खुशियां,
वो जो छोटी-सी बात पर बना लें दूरियां
तो खुद को थोड़ा संभाल लेना।
उम्र के साथ कभी तन भी लगे कमज़ोर
और दवाई से चले जीवन की डोर,
तो थोड़ा खुद को संभाल लेना।
आखिर तेरे सिवा है ही कौन तेरा?
जब बात ये समझ ले तो यकीन कर,
फिर तू ही तुझे संभाल लेगा।



