ये ज़रूरी तो नहीं – Hindi Poetry

by | Sep 19, 2021 | Hindi Poetry | 7 comments

ये ज़रूरी तो नहीं – Hindi Poetry

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ज़िंदगी जंग है ये जानते है हम,

लड़ते भी रहेंगे जब तक है दम;

पर, हर जंग का जीत ही हो अंजाम,

ये ज़रूरी तो नहीं|

मुसाफिर है हम, हर वख्त सफ़र करते है,

राहें है जो बनी हमारे लिए, उसी से गुज़रते है;

पर, उन राहों का हो मंज़िल ही आख़री मुकाम,

ये ज़रूरी तो नहीं|

अच्छा-बुरा, सच-झूठ, हाँ और नहीं भी,

चुनना ज़रूरी है कभी ग़लत, कभी सही भी;

पर, हर बार चुनाव होगा ये आसान,

ये ज़रूरी तो नहीं|

हौसलों के परिंदे बंदिशें कहाँ मानते है?

पंख छोटे ही सही, ये उड़ना जानते है;

छोटे सपनों की उड़ानों का छोटा ही हो आसमान,

ये ज़रूरी तो नहीं|

दुविधा, नाकामी, ग़लतियाँ सबके अपने-अपने है,

हर किसीके जीवनमें यह पौधे बनके पनपने है;

हिस्से आए हर कांटें का दे तक़दीर को ही इलज़ाम,

ये ज़रूरी तो नहीं|

हार या जीत सिर्फ फितरत या किस्मत तो नहीं,

कहतें है जो होना है, लिखा है कहीं;

पर, मान के ये हम छोड़ ही दें कोशिशें तमाम,

ये ज़रूरी तो नहीं|

‘जीना तो बस साहस है’, लोग जो यह सच जानते है,

अपनी मर्यादा व शक्तियाँ वे ख़ुद ही पहचानते है;

करे जग इन ‘जियालों’ की सही कद्र और सम्मान,

ये ज़रूरी तो नहीं|

हिम्मती जन को हारने का कहीं कोई अधिकार नहीं?

टूटनेवाले मन के कभी क्या जुड़ने पाते तार नहीं?

वख्त से लड़ते इंसानों के मर जाएँ अरमान,

ये ज़रूरी तो नहीं|

कुछ पाने की चाहत में वो अनजानी दौड़ में शामिल है,

इंसाँ अगर जो ठान ही ले, क्या कुछ पाने के काबिल है;

पर, आसमाँ से आगे जाने का हो हर किसीका अरमान,

ये ज़रूरी तो नहीं|

छोटे सुख-दुःख के पल भी जिनके लिए मायने रखते है,

जो मीठे, तीखे, फ़िके, तुरे जीवन के स्वाद को चखते है;

वे रोज़ सवेरे उठते ही कोई करेंगे काम महान,

ये ज़रूरी तो नहीं|

*जियाला = बहादुर

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